यह ब्लाग समर्पित है मां गंगा को ,
इस देवतुल्य नदी को, जो न सिर्फ
मेरी मां है बल्कि एक
आस्था है, एक जीवन है,
नदियां जीवित है तो हमारी संस्कृति भी जीवित है.
Monday, March 8, 2010
गंगा के करीब ,कुम्भ नगरी के कुछ दृश्य
कुम्भ नगरी गंगा के करीब बस चुकी है बिलकुल अलग व एक आलौकिक नगरी है लगता है किसी दूसरे ही लोक मे आ गये हो।यह नजारे दुर्लभ है, आलौकिकता का कुम्भ........?
1 comment:
nice
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