Sunday, September 6, 2009

ऋषिकेश एक तपस्थ्ली भाग -1

ऋषिकेश यू तो विश्व मानचित्र में योग ,अध्यात्म एवं धार्मिक  पयर्टन के रूप में ख्याति प्राप्त कर चुका है पर इस प्राचीन पौराणिक  नगरी में ऋषि . मुनि,साधु- सन्यासियों ने ही नही वरन कई महापुरूषों ने भी तप किया है।

ऋषिकेश नाम:   इस स्थान के साहित्य में अनेक नाम आये हैं यथा कुब्जाम्रक क्षेत्र हषीकेश और अब
ऋषिकेश।महाभारत वनपर्व उ082 में कुब्जाम्रक तीर्थ का उल्लेख इस प्रकार है_ तत: कुब्जाम्रक गच्छेतीथे सेवी यथा क्रमम।गो सहस्रमवाप्रोत स्वर्ग च गच्छित । जिसमे सहस्र गोदान का फल और स्वर्ग लोक की प्राप्ति के सुख का विवरण मिलता है। कालिकागम 20:25 के अनुसार महानगर के किसी कोण पर जब ऎसी बस्ती का र्निब्ष्ष्ट की जाये ,सौंदयीर्करण किया  जाये जहां महानगर के लोग भीड -भाड  भरी जिन्दगी से शोरगुल से दुर होकर रहे, उस बस्ती की कुब्जक कहते है।तपस्वी,साधु ,सन्यासी ,ऋषि,वानप्रस्थी कोलाहल से बचने के लिए यहां रहते थे । इसमे इसका नाम कुब्जाम्रक पडा ।
_________ जारी

Thursday, September 3, 2009

मै रहती हूं ऋषिकेश में.....

मै रहती हू ऋषिकेश में एक खुबसुरत तीर्थ नगरी में आज यह आधुनिक सुविधाओ से युक्त् पर्यटन का केन्द्र बन गया है। देश से ही नही विदेशों से भी यात्री बहुत बडी सख्या में यहां आते है। वजह योग ,गंगा स्नान,अध्यातम ,शान्ति के लिए । सचमुच यहां शान्ति है पता नही यह तो वही जानते होंगे जो बाहर यहां आते है।लेकिन यह जरूर है अगर मै कही बाहर चली जाउ तो मन करता जल्द से वापस आ जाउ। यह देवभूमि है यहां के दर्शन मात्र सें पुण्य मिलता है।शीघ्र ही मै आपको इस जगह की तमाम खुबियों के बार में बताउगी ।मेरे लेख्नों का पहला असांइनमेंट मुझे मिला 1997 हिन्दी दैनिक पत्र दैनिक जागरण कें लिए लिख्नना था यंहा के मंदिरो के बारे जो पौराणिक है प्राचीन है।कुछ पौराणिक है ऐतिहासिक  है गंगा का किनारा,बैराज का पुल,त्रिवेणी घाट, लछमन झुला और बहुत कुछ कितना याद आता उनको जों यहा से चले जाते है वो कैसे भुला पाते होगे ।

Featured Post

यहां वीरभद्र प्रकट हुआ था ----- वीरभद्रेश्वर मंदिर (ऋषिकेश)

पिछली पोस्ट में मैने ऋषिकेश के वीरभ्रद्र क्षेत्र का इतिहास बताया था पर इस पोस्ट में यह बता दू कि क्यो इस क्षेत्र को वीरभद्र के नाम से जाना ...