यह ब्लाग समर्पित है मां गंगा को , इस देवतुल्य नदी को, जो न सिर्फ मेरी मां है बल्कि एक आस्था है, एक जीवन है, नदियां जीवित है तो हमारी संस्कृति भी जीवित है.
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Friday, March 16, 2012
Friday, June 10, 2011
गंगा दशहरा........तथा.... गंगा
भारत की ग्रामीण जनता के जीवन में गंगा दशहरा जैसे पर्वो का बहुत ही महत्व है शहरों में भी इसका प्रभाव है पर उनकी भाग दौड भरी जिन्दगी यह पर्व अपनी पहचान खोते जा रहे है , निरन्तर श्रमलीन रहने वाली जनता के लिए गंगा दशहरा के मायने ही कुछ अलग है वह गंगादि नदियों के तट पर अपने प्रियजनो के साथ गंगा स्नान करते है अपने सुख-दुख बाटते है।

गंगाअवतरण की घटना अपने आप में आलौकिक तथा ऎतिहासकि है जिस पर इस ब्लाग में पहले भी प्रकाश डाला जा चुका है ।गंगा अवतरण ने भारत की दशा-दिशा ही बदल दी थी इसी की स्मृति में होने वाला गंगा दशहरा का पर्व युग-युग तक भगीरथ आदि महापुरूषों की याद दिलाता रहेगा जिनके नाम ही कठिन परिश्रम के प्रतीक बन गये।गंगा की महिमा का वर्णन वेदों से लेकर सम्पूर्ण अवान्तर साहित्य में भरा हुआ है
गंगा दशहरा ज्येष्ठ शुक्ला दशमी को सम्पुर्ण भारत में महान धार्मिक पर्व के रूप में मनाया जाता है गंगा के अर्विभाव की यह कथा वाल्मीकिरामायण तथा महाभारतदि ग्रन्थों में बडे विस्तार से दी गयी है --
दशमां शुक्लापक्षे तु ज्येष्ठे मासे बुधेहनि ।
अवतोरर्णा यत:स्वर्गद्वस्तर्क्षे च सरिद्वरा।।
हरते दश पापानि तस्मादृशहरा स्मृता ।
जिसका अर्थ है कि ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी को बुधवार को हस्त नक्षत्र में गंगा स्वर्ग ये धरा पर अवतरित हुई थी । इस दिन स्नानादि शुभ कर्म करने से मनुष्यों के पापों का नाश होता है ।
भारत के लोग ही नही आज गंगा विदेशियों के लिए भी गंगा मां उनके मन भी आपार श्रद्वा व विश्वास गंगा के लिए जो जीवनदायिनी है ।भारत के पूर्व प्रधान मन्त्री जवाहर लाल नेहरू के मन में भी गंगा के प्रति अटूट स्नेह व विश्वास था । उन्होने गंगा के प्रति अपनी भाव भरी श्रद्वांजलि कुछ इस तरह दी थी जिसकी कुछ पक्तियां इस प्रकार है "गंगा भारत की खास नदी है,जनता को प्रिय है।
गंगा मेरे लिए निशानी है,भारत की प्राचीनता की ,यादगार की जो बहती आई है वर्तमान तक और बहती चली जा रही है भविष्य के महासागर की ओर ।"
(मेरे लिए सबसे अहम है बस मेरा यही चिन्तन जो भी लोगो के द्वारा इस नदी की पवित्रता को बचाने के लिए जो कुछ भी जागरूकता आयी क्या उससे सचमुच ही मां गंगा जिसके जल हमने प्रदुषित कर डाला क्या वह हमारे साथ इसी तरह साफ -सुथरे वेगमयी रूप में अपना भविष्य तय कर पायेगी?)

गंगाअवतरण की घटना अपने आप में आलौकिक तथा ऎतिहासकि है जिस पर इस ब्लाग में पहले भी प्रकाश डाला जा चुका है ।गंगा अवतरण ने भारत की दशा-दिशा ही बदल दी थी इसी की स्मृति में होने वाला गंगा दशहरा का पर्व युग-युग तक भगीरथ आदि महापुरूषों की याद दिलाता रहेगा जिनके नाम ही कठिन परिश्रम के प्रतीक बन गये।गंगा की महिमा का वर्णन वेदों से लेकर सम्पूर्ण अवान्तर साहित्य में भरा हुआ है
गंगा दशहरा ज्येष्ठ शुक्ला दशमी को सम्पुर्ण भारत में महान धार्मिक पर्व के रूप में मनाया जाता है गंगा के अर्विभाव की यह कथा वाल्मीकिरामायण तथा महाभारतदि ग्रन्थों में बडे विस्तार से दी गयी है --
दशमां शुक्लापक्षे तु ज्येष्ठे मासे बुधेहनि ।
अवतोरर्णा यत:स्वर्गद्वस्तर्क्षे च सरिद्वरा।।
हरते दश पापानि तस्मादृशहरा स्मृता ।
जिसका अर्थ है कि ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी को बुधवार को हस्त नक्षत्र में गंगा स्वर्ग ये धरा पर अवतरित हुई थी । इस दिन स्नानादि शुभ कर्म करने से मनुष्यों के पापों का नाश होता है ।
भारत के लोग ही नही आज गंगा विदेशियों के लिए भी गंगा मां उनके मन भी आपार श्रद्वा व विश्वास गंगा के लिए जो जीवनदायिनी है ।भारत के पूर्व प्रधान मन्त्री जवाहर लाल नेहरू के मन में भी गंगा के प्रति अटूट स्नेह व विश्वास था । उन्होने गंगा के प्रति अपनी भाव भरी श्रद्वांजलि कुछ इस तरह दी थी जिसकी कुछ पक्तियां इस प्रकार है "गंगा भारत की खास नदी है,जनता को प्रिय है।
गंगा मेरे लिए निशानी है,भारत की प्राचीनता की ,यादगार की जो बहती आई है वर्तमान तक और बहती चली जा रही है भविष्य के महासागर की ओर ।"
(मेरे लिए सबसे अहम है बस मेरा यही चिन्तन जो भी लोगो के द्वारा इस नदी की पवित्रता को बचाने के लिए जो कुछ भी जागरूकता आयी क्या उससे सचमुच ही मां गंगा जिसके जल हमने प्रदुषित कर डाला क्या वह हमारे साथ इसी तरह साफ -सुथरे वेगमयी रूप में अपना भविष्य तय कर पायेगी?)
Saturday, April 30, 2011
गंगा की दशा को सुधारने के लिए बनी परियोजना ........
गंगा जीवनदायिनी नदी, भारतवासियों के ह्रदयों में ही नही विदेशियों के ह्रदय में भी वास करती है।हम सभी के जीवन की यह प्राण है।
प्रदुषित गंगा की दशा को सुधारने के लिए शायद सरकार को जो सुध आयी है उसके चलते 7,000 करोड रू0 की लागत से गंगा नदी को राष्ट्रीय गंगा नदी घाटी प्राधिकरण से साफ करने की परियांजना को मंजूरी दी गयी है इसमें केन्द्र 5100 करोड रू0 खर्च करेगा उत्तराखण्ड,उत्तर प्रदेश,बिहार ,झारखण्ड एवं पश्चिम बंगाल को राज्य सरकारे 1900 करोड रू0 का खर्च वहन करेगी । विश्व बैंक ने इस परियोजना को लगभग 4600 करोड रू0 का कर्ज देने की सहमति दी है इस परियोजना की समय सीमा आठ साल की रखी गयी है प्रधानमंत्री खुद इस प्राधिकरण की अध्यक्षता करेगें । इस परियोजना का उद्देश्य गंगा नदी का संरक्षण ,नदी घाटी की व्यापक योजना तथा प्रबंधन के जरिए गंगा नदी के पर्यावरणीय बहाव को सुनिश्चत करना है । इस परियोजना को पहले की परियोजनाओ से अधिक प्रभावी बनाया गया है जिसमें पर्यावरणीय नियमों का पालन ,नगर निगम के गंदे पानी के नालो ,औघौगिक प्रदुषण ,कचरे और नदी के आस पास के इलाको का बेहतर तथा कारगर प्रंबधन शामिल किया गया है ।

इस परियोजना का स्वागत है पर यहां यह भी उल्लेखनीय है जैसा कि हिन्दी दैनिक समाचार पत्र, हिन्दुस्तान के शुक्रवार, 29,अप्रैल के सम्पादकीय में लिखा गया एक कडवा सच है, "होना यह चाहिए था कि इस वर्ष हम गंगा एक्शन प्लान की रजत जंयती धूमधाम से मनाते ,लेकिन पिछले पच्चीस साल में इस प्लान ऎसा कुछ भी नही हुआ जिसे उपलब्धि के तौर पर पेश कर सके "।
1986 में राजीव गांधी के प्रधानमंत्रित्व काल में गंगा एक्शन प्लान की शुरूवात वाराणसी में हई थी इस योजना में 2,000 करोड रूपये खर्च कर चुकने के बावजूद गंगा में प्रदुषण घटा नही बल्कि बढा ही है । वास्तव में राजीव गांधी भविष्य दृष्टा थे उन्होने यह योजना अपनी व्यक्तिगत दिलचस्पी की वजह से शुरू करवायी थी अगर इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू कर व सभी लोगो की निज की चेतना से मां गंगा व अन्य प्रदुषित होती नदियों के बारे ध्यान रखा होता तो शायद यह ब्लाग भी न लिखा गया होता। पढे अन्य पोस्ट " गंगा की इस हालत का जिम्मेदार कौन ?,गंगा नदी ही नही अद्धभुत संस्कृति .... कितने भी करोडो खर्च कर लो मां गंगा तब तक पुर्ण रूप से प्रदुषण मुक्त व स्वच्छ नही होगी जब जक गंदे नाले फैक्टियों के अपशिष्ट , मल, कुडा कचरा ,मरे हुए जानवर और यह भावना गंगा में प्रवाहित कर दो ,यह भावना मन से नही निकलेगी तब तक कितनी भी योजनाये बना लो कुछ नही होने वाला जहां तक बात जनता से सहयोग लेने की है तो यह कैसे संभव है जब उन्हे यही बताया जायेगा की गंगा में बहा दो, गंगा तो लोगो के अपशिष्ट बहा ले जाने मात्र के लिए जान पडती हो मानो .... तब उसके जल को आचमन के लिए लायक कब तक रख पायेगे......?
Sunita Sharma
freelancer journalist
Uttarakhand
प्रदुषित गंगा की दशा को सुधारने के लिए शायद सरकार को जो सुध आयी है उसके चलते 7,000 करोड रू0 की लागत से गंगा नदी को राष्ट्रीय गंगा नदी घाटी प्राधिकरण से साफ करने की परियांजना को मंजूरी दी गयी है इसमें केन्द्र 5100 करोड रू0 खर्च करेगा उत्तराखण्ड,उत्तर प्रदेश,बिहार ,झारखण्ड एवं पश्चिम बंगाल को राज्य सरकारे 1900 करोड रू0 का खर्च वहन करेगी । विश्व बैंक ने इस परियोजना को लगभग 4600 करोड रू0 का कर्ज देने की सहमति दी है इस परियोजना की समय सीमा आठ साल की रखी गयी है प्रधानमंत्री खुद इस प्राधिकरण की अध्यक्षता करेगें । इस परियोजना का उद्देश्य गंगा नदी का संरक्षण ,नदी घाटी की व्यापक योजना तथा प्रबंधन के जरिए गंगा नदी के पर्यावरणीय बहाव को सुनिश्चत करना है । इस परियोजना को पहले की परियोजनाओ से अधिक प्रभावी बनाया गया है जिसमें पर्यावरणीय नियमों का पालन ,नगर निगम के गंदे पानी के नालो ,औघौगिक प्रदुषण ,कचरे और नदी के आस पास के इलाको का बेहतर तथा कारगर प्रंबधन शामिल किया गया है ।

इस परियोजना का स्वागत है पर यहां यह भी उल्लेखनीय है जैसा कि हिन्दी दैनिक समाचार पत्र, हिन्दुस्तान के शुक्रवार, 29,अप्रैल के सम्पादकीय में लिखा गया एक कडवा सच है, "होना यह चाहिए था कि इस वर्ष हम गंगा एक्शन प्लान की रजत जंयती धूमधाम से मनाते ,लेकिन पिछले पच्चीस साल में इस प्लान ऎसा कुछ भी नही हुआ जिसे उपलब्धि के तौर पर पेश कर सके "।
1986 में राजीव गांधी के प्रधानमंत्रित्व काल में गंगा एक्शन प्लान की शुरूवात वाराणसी में हई थी इस योजना में 2,000 करोड रूपये खर्च कर चुकने के बावजूद गंगा में प्रदुषण घटा नही बल्कि बढा ही है । वास्तव में राजीव गांधी भविष्य दृष्टा थे उन्होने यह योजना अपनी व्यक्तिगत दिलचस्पी की वजह से शुरू करवायी थी अगर इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू कर व सभी लोगो की निज की चेतना से मां गंगा व अन्य प्रदुषित होती नदियों के बारे ध्यान रखा होता तो शायद यह ब्लाग भी न लिखा गया होता। पढे अन्य पोस्ट " गंगा की इस हालत का जिम्मेदार कौन ?,गंगा नदी ही नही अद्धभुत संस्कृति .... कितने भी करोडो खर्च कर लो मां गंगा तब तक पुर्ण रूप से प्रदुषण मुक्त व स्वच्छ नही होगी जब जक गंदे नाले फैक्टियों के अपशिष्ट , मल, कुडा कचरा ,मरे हुए जानवर और यह भावना गंगा में प्रवाहित कर दो ,यह भावना मन से नही निकलेगी तब तक कितनी भी योजनाये बना लो कुछ नही होने वाला जहां तक बात जनता से सहयोग लेने की है तो यह कैसे संभव है जब उन्हे यही बताया जायेगा की गंगा में बहा दो, गंगा तो लोगो के अपशिष्ट बहा ले जाने मात्र के लिए जान पडती हो मानो .... तब उसके जल को आचमन के लिए लायक कब तक रख पायेगे......? Sunita Sharma
freelancer journalist
Uttarakhand
Thursday, October 28, 2010
मां गंगा को बचाने की तैयारियां......................।
देवनदी गंगा को बचाने के लिए उसके लाडलों में जो चेतना आयी है वह काबिले तारीफ है इसके लिए कुछ प्रयास भी किये जा रहे रहे है इन्ही प्रयासों के कुछ समाचार विभन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित हुए।
आइये मां गंगा की अविरलता ,स्वच्छता,पवित्रता तथा उसके किनारे बसे नगरों की तरफ जो ध्यान गया है उसी से सम्बन्धित खबरों पर नजर डाले।
प्रकाशित समाचार "हिन्दुस्तान" हिन्दी समाचार पत्र
23अक्टूबर2010
प्रकाशित समाचार ,राष्टीय सहारा,28 अक्टूबर 2010
प्रकाशित समाचार,दैनिक जागरण,28 अक्टूबर 2010
दैनिक जागरण,27 अक्टूबर 2010
दैनिक जागरण 25,अक्टूबर 2010
दैनिक जागरण ,17 नवम्बर 2010
Tuesday, September 21, 2010
क्रोधित है मां.........................!
गंगा के करीब रहने वाले सकते में है आश्चर्य में है उनकी मां गंगा क्यों कितने उफान पर है आज अपने साथ सब कुछ समेट लेना चाहती है गंगा उफन पडी लोगो की जिन्दगी रूक गयी पिछले शनिवार रात तेज बारिश के बाद से ही गंगा के उफान ने बाढ का रूप ले लिया रात को ही लोगो को अपना घर छोड सुरक्षित जगहो पर शरण ली जिनके रिश्तेदार थे वह वहो गये जिनके नही उनके लिए धर्मशालाये खुल दी गयी रविवार तक डर की स्थति बनी रही क्योंके गंगा अपने पूरे विकराल रूप में थी मुनि की रेती ,लक्ष्मणझूला ,स्वर्गआश्रम व शयामपुर के कई इलाको में गंगा के पानी ने भारी तबाही मचायी वह उफनती हई सबकुछ अपने वेग में समाना चाहती थी गंगा के यह रौद्र रूप देख सभी सकते में है । तीन चार दिन से ऋषिकेश के लोगो की सासें मानो अटक सी गयी गंगा का पानी उसके निकटवर्ती रहने वालो पर मानो कहर बन कर टूटा है उत्तराखण्ड में हो रही लगातार बारिश ने यहां के लोगो को दहशत से भर दिया उस पर बराबर यह डर भी बना रहा के यह जलप्रलय अब कौन सा रूप ले लेगी सभी डरे सहमे से रहे उस पर टिहरी बांध से पानी छोडने की खबरों ने तीर्थ नगरी के लोगो को पूरी तरह आने वाले समय के इन्तजार व खौफ की गिरफत में रखा जलस्तर में भारी वृद्वि की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने भी अलर्ट जारी कर दिया हालाकि टिहरी बांध छोडे जाने वाले पानी से यहां कई असर नही पडा पर अभी भी गंगा नदी अपने खतरे के निशान से उपर है । तीर्थ नगरी को कल से बारिश से राहत मिली आज सूर्य देव ने दर्शन दिये वरना तो बीते दिन इस तरह बीते जिसको बयान नही कर सकते राज्य में स्कूलो की छुटटी कर दी गयी । गंगा के सभी घाट पूरी तरह डूब चुके थे किनारे बसी बस्तिया पानी में डूब गयी थी ।
सोमवार को जब बारिश बन्द हई लोगो ने अपने घरो का रूख किया पर ,यह क्या ? जिन्दगी भर जो जमा किया वह तो पल भर में तबाह हो गया जिन घाटो पर आरती व आध्यात्म की धारा बहती थी उन घाटों पर मां गंगा का जल पूरे में अपना साम्राज्य बनाये हुए था मानो यह कहता हुआ हे पापियों अब तुम मेरे करीब रहने के मेरे जल को छुने के योगय नही रहे अब चेतो अपने कर्मो में सुधार करो नही तो मेरे जल से तुम सभी जलमग्न हो जाओगे गंगा के किनारे रहने वाले लोगो को अपनी मां के अत्यंत क्रोध का सामना करना पडा हो भी क्यो न गंगा के करीब जो तीर्थ नगरी में घटता है उसे तो मां रूष्ट होगी ही न उस जो लोग यह समझते है कितन भी पाप कर लो गंगा में स्नान करके सब धुल जायेगे वह नही जानते गंगा की शक्ति असीम है वह पापनाशिनी तो है ही जीवनदायिनी भी है पर जब वह उफन पडती है सिर्फ जीवन से ही मुक्त कर देती है......................!
आज जब सूर्यदेव आये व गंगा का उफान कुछ कम हुआ तो ने तीर्थ नगरी के लोगो के चेहरे पर.......................................................................
मुस्कान ला दी अब जिन्दगी शायद अपने राह पर चल पडेगी............... ।

Thursday, July 1, 2010
हेमामालिनी स्पर्शगंगा अभियान की ब्रांड एंबेसडर.......... कितना सही, कितना गलत?
आजकल यह चर्चा जोरो पर है कि हेमा मालिनी को स्पर्श गंगा का ब्रांड एंबेसडर बनाने पर उत्तराखण्ड सरकार अपना राजनैतकि उद्देशय सिद्व करना चाहती है व जनमानस सुप्रसि़द्व अभेनेत्री और नृत्यांगना के मां गंगा के ब्रांड एंबेसडर बनाये जाने से आहत है जबकि गंगा तो खुद संस्कृति की वाहक है उसे इस तरह के ब्रांड एंम्बेसडर की आवश्यकता है ही नही ,यह भी विरोधाभास है कि इसके लिए उत्तराखण्ड के ही किसी अन्य व्यक्ति को चुनना चाहिए था ।
क्या सचमुच उत्तराखण्ड सरकार ने हेमा जी को गंगा नदी से जुडे स्पर्श गंगा अभियान के लिए हेमा जी को ब्रांड एंम्बेसडर बना कर कोई गलती की है ? जबकि सत्यता तो यह भी है हेमा जी जैसी अभिनेत्री व नृत्यागना को गंगा के लिए ब्रांड एंम्बेसडर बनाये जाने पर गलत क्या है वह उन्होने अपने अभिनय व नृत्य कला से अपनी प्रतिभा का लोहा देश विदेश में मनाया है वह अन्तराष्ट्रीय स्तर की कलाकार है यदि मां गंगा के उद्वार में वह अपना योगदान कर सकती है तो इसमे कुछ बुरा नही है । वह इस अभियान से जुडना अपना सौभाग्य मानती है गंगा नदी देश के ही नही वरन् विदेशियों के हृदय की भी धारा है उनके मन में भी गंगा के प्रति आपार स्नेह व आस्था है जिस जनमानस की भावनाओं के आहत होने बात जो लोग कर रहे है तो गंगा नदी को प्रदुषित करने में चाहे आम जन हो या सन्त भी उसके प्रदुषण व उसकी मार्मिक हालत जिम्मेदार सभी है। जो लोग आज गंगा नदी की साफ -सफाई के प्रति जागरूक हो चुके है उनके मन में हेमा जी प्रति भी उतना ही विश्वास है कि वह अपने जिम्मेदारी जो उन्होने ली है उसमे सफल हो सकेगी यदि प्रदेश के मुख्यमंत्री जब गंगा नदी के प्रति इतनी संवेदनशीलता रखते हो तो आज मां गंगा के उद्वार के नाम पर सभी को ईमानदार होना ही पडेगा ताकि हम अपनी जीवनदायिनी को उसके स्थिति से उबारने में कुछ तो कामयाब हो सके मां गंगा की दुर्दशा के जिम्मेदार हम सभी है बाहरी ताकत ने तो उसे मरणासन्न नही किया ।
जब यहां के लोग गंगा को अपनी मां मानते है तो वह यह क्यों नही समझते जब मां की हालत सही होगी तो तब ही तो वह अपने बच्चों के लिए सही रह पायेगी लेकिन यह भी एक विडम्बना ही है संतान अपनी मां की परवाह बहुत कम करती है भले मां अपनी जान तक अपनी संतान के लिए न्यौछावर कर दे ।जो लोग यह सोचते है कि हेमा जी को मां गंगा का ब्रांड एंम्बेसडर बना दिये जाने पर सरकार ने गंगा को भी प्रोडक्ट बना दिया है वह कितना सही यह तो वही जाने लेकिन आज जो गंगा कि दशा है उससे बचाने के लिए हमे इस जीवनदायिनी के लिए कुछ भी करना पडे वह भी कम होगा ।जब स्नानपर्वो पर जन सैलाब उमडता है तथा उसके बाद इस नदी का जो हाल यह जनमानस करता है तब उसकी आस्था कहां जाती है। वह इसके प्रति खुद से चिन्तत नही होगा तब तक कोई कुछ भी नही कर सकता जो समर्थ है उन्हे इस कार्य में आगे आना ही होगा मैने यह ब्लाग मां को समर्पित किया ताकि थोडी सी भी आवाज उन सभी तक पहुंच सके जो इस दिव्य नदी को आने वाली पीढी के लिए बचा सके । हमे इसके लिए अपने उन संस्कारों मे भी बदलाव लाना होगा जो इस नदी से जुडे है मां गंगा के हित के लिए अगर कुछ सके तभी यह जीवन सार्थक होगा व वह ऋण भी तभी उतरेगा जो एक मां का होता है जिसे हमे कभी नही चुका सकते ...........शायद
(हेमा मालिनी चित्र गुगल से साभार)
पढे गंगा नदी से सम्बन्धित अन्य पोस्ट ......(गंगा में प्रवाहित कर दो.....)
क्या सचमुच उत्तराखण्ड सरकार ने हेमा जी को गंगा नदी से जुडे स्पर्श गंगा अभियान के लिए हेमा जी को ब्रांड एंम्बेसडर बना कर कोई गलती की है ? जबकि सत्यता तो यह भी है हेमा जी जैसी अभिनेत्री व नृत्यागना को गंगा के लिए ब्रांड एंम्बेसडर बनाये जाने पर गलत क्या है वह उन्होने अपने अभिनय व नृत्य कला से अपनी प्रतिभा का लोहा देश विदेश में मनाया है वह अन्तराष्ट्रीय स्तर की कलाकार है यदि मां गंगा के उद्वार में वह अपना योगदान कर सकती है तो इसमे कुछ बुरा नही है । वह इस अभियान से जुडना अपना सौभाग्य मानती है गंगा नदी देश के ही नही वरन् विदेशियों के हृदय की भी धारा है उनके मन में भी गंगा के प्रति आपार स्नेह व आस्था है जिस जनमानस की भावनाओं के आहत होने बात जो लोग कर रहे है तो गंगा नदी को प्रदुषित करने में चाहे आम जन हो या सन्त भी उसके प्रदुषण व उसकी मार्मिक हालत जिम्मेदार सभी है। जो लोग आज गंगा नदी की साफ -सफाई के प्रति जागरूक हो चुके है उनके मन में हेमा जी प्रति भी उतना ही विश्वास है कि वह अपने जिम्मेदारी जो उन्होने ली है उसमे सफल हो सकेगी यदि प्रदेश के मुख्यमंत्री जब गंगा नदी के प्रति इतनी संवेदनशीलता रखते हो तो आज मां गंगा के उद्वार के नाम पर सभी को ईमानदार होना ही पडेगा ताकि हम अपनी जीवनदायिनी को उसके स्थिति से उबारने में कुछ तो कामयाब हो सके मां गंगा की दुर्दशा के जिम्मेदार हम सभी है बाहरी ताकत ने तो उसे मरणासन्न नही किया ।
जब यहां के लोग गंगा को अपनी मां मानते है तो वह यह क्यों नही समझते जब मां की हालत सही होगी तो तब ही तो वह अपने बच्चों के लिए सही रह पायेगी लेकिन यह भी एक विडम्बना ही है संतान अपनी मां की परवाह बहुत कम करती है भले मां अपनी जान तक अपनी संतान के लिए न्यौछावर कर दे ।जो लोग यह सोचते है कि हेमा जी को मां गंगा का ब्रांड एंम्बेसडर बना दिये जाने पर सरकार ने गंगा को भी प्रोडक्ट बना दिया है वह कितना सही यह तो वही जाने लेकिन आज जो गंगा कि दशा है उससे बचाने के लिए हमे इस जीवनदायिनी के लिए कुछ भी करना पडे वह भी कम होगा ।जब स्नानपर्वो पर जन सैलाब उमडता है तथा उसके बाद इस नदी का जो हाल यह जनमानस करता है तब उसकी आस्था कहां जाती है। वह इसके प्रति खुद से चिन्तत नही होगा तब तक कोई कुछ भी नही कर सकता जो समर्थ है उन्हे इस कार्य में आगे आना ही होगा मैने यह ब्लाग मां को समर्पित किया ताकि थोडी सी भी आवाज उन सभी तक पहुंच सके जो इस दिव्य नदी को आने वाली पीढी के लिए बचा सके । हमे इसके लिए अपने उन संस्कारों मे भी बदलाव लाना होगा जो इस नदी से जुडे है मां गंगा के हित के लिए अगर कुछ सके तभी यह जीवन सार्थक होगा व वह ऋण भी तभी उतरेगा जो एक मां का होता है जिसे हमे कभी नही चुका सकते ...........शायद
(हेमा मालिनी चित्र गुगल से साभार)
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Thursday, June 17, 2010
किससे कहे व्यथा अपनी.....?
मां तुम आयी धरती परउद्वार किया पुरखों का
छलनी है हृदय आज
मेरा देखु जब तेरी दुर्दशा
हर मां के सीने में
यह कैसा दर्द छिपा है
के उसके ही लाडलों ने लहुलुहान किया है ।
एक मां ही होती है
जो जख्मों को छिपा लेती है
किससे कहे व्यथा अपनी
क्या उसकी सुन लेगा
अपनी धुन में इस इन्सा ने
जहनुम धरा को कर दिया हैफिर कौन भगीरथ आयेगा
मां तूझे लुप्त होने से कौन बचा पायेगा
तूझ बिन यह जीवन जीवन नही है
तू है तो प्राण है ,यह जन-जन को कौन समझायेगा,
तू है तो प्राण है, यह जन-जन को कौन समझायेगा............।
Wednesday, May 26, 2010
Tuesday, March 16, 2010
गंगा में स्नान करना है.........







गंगा के प्रति भक्ति व स्नान का कितना महत्व है यह तब पता चलता है जब महाकुम्भ हो सोमवती अमावस्या हो तथा ऎसे ही कितने ही महत्वपूर्ण पर्व व त्यौहार सिर्फ समानता यह कि गंगा में डूबकी लगानी है यह गंगा के प्रति आस्था ही है ।कल सोमवती अमवस्या पर श्रद्वालु इतवार की रात से ही आने शुरू हो गये थे तमाम तकलीफों के बाद भी उनके मन में यह इच्छा बलवती थी बस गंगा में स्नान का लाभ उठाना है। हरिद्वार महाकुम्भ में जहां साधु-संतों समेत श्रद्वालुओ ने भी गंगा में स्नान किया अनुमान है कि लगभग 64 लाख लोगो ने गंगा डुबकी लगायी । कितनी शक्ति है इस दैवीय नदी में ।Tuesday, February 23, 2010
तो गंगा की सुध आ ही गयी......... राष्ट्रपति का आश्वासन 2010 तक गंगा प्रदुषण मुक्त
आज मुझे इस बात की बहुत खुशी है कि देश की राष्ट्रपति ने 2020 तक गंगा नदी को प्रदुषण मुक्त कराने का वादा किया है किसी भी गन्दे नाले या औघौगकि कचरे को शोधन के बिना उसमें नही गिरने की व्यवस्था की जायेगी राष्टीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण के मिशन निर्मल गंगा के तहत यह सुनिशचत किया जायेगा कि 2020 तक किसी शहरी नाले व कचरे को बिना शोधन के मां गंगा में न प्रवाहित किया जाये। काश यह सब प्रावधान शुरू से किये होते तो आज हम इन जीवनदायिनी नदियों की दुर्दशा के लिए आवाज न उठाते न दसकी दशा पर आंसु बहाते ।जो नदी हमारी प्राण है उस पर सभी को एकमत व गम्भीर होना है केवल राजनीति से प्रेरित न होकर सार्थक प्रयास हो तभी हम अपनी पृथ्वी ,नदियों ग्लेशियरों व प्रकृति को बचा पायेगे हमे नाज होना चाहिए कि हम बहृमांड के सबसे खुबसुरत ग्रह के निवासी है।मैने अपनी मां गंगा को बचाने की अपील की है समर्थ लोगो से काश मेरा यह सपना पुरा हो जाये, फिर इस नदी की लहरे मुझे रात को आराम से सोने दे.............................।
Wednesday, September 30, 2009
गंगा नदी ही नही एक अद्भभुत संस्कृति भी....... अन्तिम भाग.. (वर्तमान परिवेश में गंगा)
गंगा नदी ही नही संस्कुति भी....अन्तिम भाग.........
मैने अपनी पुरानी पोस्टों में ज्रिक किया था कि गंगा नदी से मूर्तिकार व चित्रकार सभी प्रभावित रहे है, तो यहां पर यह बताना और भी जरूरी हो जाता है कि हमारे समाज के मनोरंजन का सबसे सशक्त व असरदायक माध्यम सिनेमा को भी गंगा नदी ने आकर्षित किया चाहे फिल्मों की पटकथा की मांग हो या फिर गंगा के उपर बनी फिल्में व गाने ही क्यूं न हो कितनी ही किताबें ,लेख, आडियों विडियों एलबमें ,चित्रकथायें, ड्राक्युमेंट्री इत्यादि गंगा नदी पर बन चुकी है।गंगा के बारे में अभी तक उसकी ऎतिहासिकता एंव पौराणिकता व नदी किनारें पल्लवित हुई संस्कुति के बारे काफी कुछ बता चुकी हूं। अब आगे....अगर पौराणिकता एंव धार्मिकता की दृष्टि से हटकर गंगा को एक नदी के रूप में देखे तो संसार के लम्बे जलमार्गों में सें एक गंगा नदी का नाम भी आता है ,यही पहली ऎसी नदी है जिसकी जलधारा को नौकाआ द्वारा भारवहन के लिए तथा आवागमन के प्रमुख साधन के लिए प्रयोग किया जाता है ।नदी में मछलियां तथा सर्पो की अनेक प्रजातियां पायी जाती है, यह कृषि ,पर्यटन ,साहसिक खेलों के लिए एंव उघोगों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दंती है ।वैज्ञानिक मानते है कि इस के नदी के जल में बैक्टीरियों फेज नामक विषाणु होते है जो जीवाणु व विषाणु को जीवित नही रहने देता।
इसकी मिटट्री.घाटी उपजाउ एंव घनी आबादी वाली हैं कलकत्ता,हावडा,पटना,इलाहाबाद एंव कानपुर जैसे बडे व औघौगिक नगर इसके किनारे बसे है।कलकत्ता तक पहुंचते -पंहुचते गंगा इतनी प्रदुषित हो जाती है कि उसकी वैभवता व पवित्रता मात्र काल्पनिक लगने लगती है किनारे बसे तीर्थो ,नगरों में धार्मिक ,सामाजिक,सांस्कृतिक व पर्यावरण का प्रदुषित प्रकोप आज की कटु वास्तवकिता है वे र्तीथ जिनको देखने मात्र से ही मनुष्यों कों मोक्ष प्राप्त होता था उनकी पावनता संदेहास्पद हो चुकी है।
गंगा को सिर्फ स्वर्गिक नदी मान कर पूजा करने के व स्नान करने के अलावा यह सोचने की आवश्यकता है कि गंगा ने जो हमें समृद्वशाली संस्कृति ,सभ्यता ,उपजाऊ घाटी ,वन-सम्पदा ,मैदान ,जल-सस्थान ,विघुत -विकास की सम्भावनायें दी है उनका संरक्षण कितना आवश्यक है । तेजी से बढता प्रदुषण इस सबको विनाश की और ले जायेगा और क्या हम अपनी सभ्यता संस्कृति को यूं ही नष्ट होते देखते रहेगे ?क्या हिमालय की सुध लेने की आवश्यकता नही है ?इस वैज्ञानिक ,भौतिकतावादी युग में अपनी जलवायु प्रकुति को देखते हुए विकास का माडल चुनने की आवश्यकता है न की किसी की नकल की ।
बहराल तेजी से बदलते भागते इस युग में जहां सभ्यता व संस्कृति जैसे शब्द अपने मायने खो रहे है वहां सदियों से गंगा के प्रति जों श्रद्वा व भक्ति हमारे पूवजों ने हमें सिखाइ है उसका सार इसी में है हम इसकी पवित्रता व वैभवता को बचायें रखने के लिए प्रयत्नशील हो आज से ही........कही ऎसा न हो कि बस हम यह गीत ही गाते रह जाये कि "गंगा में स्नान करेगे अपनी मुक्ति के लिए "......और आने वाली पीढी को उसकी कहांनियां ही सुनाते रह जाये..........।
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(चित्र गुगल व टि्प एडवाइसर से साभार)
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